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एलपीजी संकट से बाजार में बढ़ी महंगाई
देश में एलपीजी गैस की कमी का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण चाय-नाश्ते की दुकानों से लेकर छोटे होटल और रेस्तरां तक खर्च बढ़ गया है। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ा है। कई जगहों पर पहले जहां 10 रुपये में मिलने वाली चाय अब 20 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह पूरी-सब्जी, समोसा, मटर पनीर और गोलगप्पे जैसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। दुकानदारों का कहना है कि गैस सिलेंडर महंगा और मुश्किल से मिलने के कारण उन्हें अपने खर्च को पूरा करने के लिए कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। इससे आम लोगों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
छोटे कारोबारियों की बढ़ी परेशानी
एलपीजी संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-खोमचे वालों पर पड़ा है। इन छोटे कारोबारियों का पूरा कामकाज गैस सिलेंडर पर ही निर्भर होता है। लेकिन जब गैस समय पर नहीं मिल रही है तो उन्हें अपने काम को चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई दुकानदारों का कहना है कि उन्हें सिलेंडर के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं या फिर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में उनके लिए पुराने दामों पर सामान बेचना संभव नहीं रह गया है। इसलिए उन्हें मजबूरी में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।
मेन्यू में भी किया जा रहा बदलाव
गैस संकट के कारण कई होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने अपने मेन्यू में भी बदलाव करना शुरू कर दिया है। जिन व्यंजनों को बनाने में ज्यादा गैस की जरूरत होती है, उन्हें फिलहाल सीमित कर दिया गया है। कुछ जगहों पर केवल जरूरी और जल्दी बनने वाले व्यंजन ही तैयार किए जा रहे हैं। होटल संचालकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण उन्हें अपने कारोबार की रणनीति बदलनी पड़ रही है। अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर और भी ज्यादा देखने को मिल सकता है।
इलेक्ट्रिक उपकरणों का सहारा
कुछ कारोबारियों ने गैस की कमी से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। कई जगहों पर खाना बनाने के लिए इलेक्ट्रिक तंदूर, इंडक्शन चूल्हा और अन्य उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि यह व्यवस्था पूरी तरह से गैस की जगह नहीं ले सकती, लेकिन इससे कुछ हद तक काम चलाया जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि यह विकल्प महंगा जरूर है, लेकिन फिलहाल यही एक तरीका है जिससे उनका काम जारी रह सकता है।
ग्राहकों पर भी बढ़ा खर्च
खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का असर सीधे ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। पहले जो लोग रोजाना बाहर चाय-नाश्ता करते थे, उन्हें अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। कई ग्राहकों का कहना है कि अचानक बढ़ी कीमतों से उनका बजट प्रभावित हो रहा है। हालांकि दुकानदारों का कहना है कि यह बढ़ोतरी उनकी मजबूरी है क्योंकि गैस की कमी के कारण उनका खर्च बढ़ गया है।
स्थिति सामान्य होने की उम्मीद
कारोबारियों और ग्राहकों दोनों को उम्मीद है कि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य होगी। अगर गैस सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ती है तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी धीरे-धीरे सामान्य हो सकती हैं। फिलहाल बाजार में स्थिति अस्थिर बनी हुई है और सभी लोग इस संकट के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे बाजार और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। इसलिए इस समस्या का जल्द समाधान होना जरूरी है।
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