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विवादित चैप्टर हटाने की प्रक्रिया
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने हाल ही में कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब "समाज की खोज: भारत और उससे परे" में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार विषयक एक विवादित चैप्टर शामिल किया था। इस चैप्टर में न्यायपालिका के विभिन्न मामलों और भ्रष्टाचार से जुड़े उदाहरण दिए गए थे, जो शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों के बीच बहस का कारण बने।
इस विवाद के बाद NCERT ने तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह चैप्टर हटाया जा चुका है। NCERT ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय छात्रों के हित और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिया गया। सोशल मीडिया पर इसकी प्रतिक्रिया मिश्रित रही, कुछ लोग इसे सही कदम मान रहे थे, जबकि कुछ ने शिक्षा में वास्तविकता दिखाने के दृष्टिकोण का समर्थन किया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और NCERT की प्रतिक्रिया
बचाव में, NCERT ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब में विवादित चैप्टर शामिल होने पर नाराजगी जताते हुए आदेश दिया था कि किताब की हार्ड कॉपी और डिजिटल वर्ज़न को संशोधित किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों और छात्रों को ऐसे सामग्री से बचाना आवश्यक है जो संवेदनशील हो और न्यायपालिका के विश्वास को प्रभावित कर सके।
इस आदेश के बाद NCERT ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किताब से चैप्टर हटाया और छात्रों तथा अभिभावकों से माफी मांगी। परिषद ने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी किसी संवेदनशील संस्थान या व्यक्ति का अपमान करना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों में सामग्री का चयन और समीक्षा और भी सख्त होगी।
शिक्षकों और अभिभावकों की प्रतिक्रियाएँ
शिक्षकों और अभिभावकों ने इस कदम पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कई अभिभावकों ने इसे सही निर्णय माना क्योंकि यह बच्चों के मनोबल और विश्वास को प्रभावित कर सकता था। वहीं कुछ शिक्षकों का मानना है कि वास्तविक जीवन की घटनाओं और भ्रष्टाचार के उदाहरणों को पढ़ाना महत्वपूर्ण था ताकि छात्र समाज और न्यायपालिका की सही समझ विकसित कर सकें।
NCERT ने इस प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए कहा कि भविष्य में शिक्षण सामग्री में संतुलन बनाए रखा जाएगा। शिक्षकों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे छात्रों को संवेदनशील विषयों पर समझदारी से शिक्षित करें।
डिजिटल और हार्ड कॉपी में संशोधन
NCERT ने बताया कि किताब की डिजिटल वर्ज़न और हार्ड कॉपी दोनों को संशोधित किया गया है। विवादित चैप्टर को पूरी तरह हटा दिया गया है और इसके स्थान पर सामान्य सामाजिक और नागरिक शिक्षा विषयक सामग्री शामिल की गई है। इस प्रक्रिया में शिक्षकों, विशेषज्ञों और कानूनी सलाहकारों की मदद ली गई।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पाठ्यपुस्तकें बच्चों के लिए सुरक्षित और शिक्षाप्रद बनी रहें। भविष्य में किसी भी विवादित सामग्री को शामिल करने से पहले व्यापक समीक्षा की जाएगी।
NCERT की माफी और भविष्य की नीति
NCERT ने स्पष्ट किया कि इस विवाद के लिए उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से माफी मांगी है। परिषद ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की सामग्री का चयन और समीक्षा और अधिक सख्ती से किया जाएगा।
इस घटना ने शिक्षा में संवेदनशील विषयों पर चर्चा और नीति निर्धारण के महत्व को उजागर किया है। NCERT का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पाठ्यपुस्तकें बच्चों के विकास और समाज के प्रति जागरूकता बढ़ाने का साधन बने।
शिक्षा क्षेत्र में संतुलन और जिम्मेदारी
इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा संस्थानों के लिए संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। पाठ्यपुस्तकों में संवेदनशील विषयों को शामिल करते समय बच्चों की उम्र, मानसिकता और सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखना अनिवार्य है। NCERT ने इस विवाद से सीखा कि केवल जानकारी देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही ढंग से और समय पर सामग्री प्रस्तुत करना भी जरूरी है।
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