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एआई और प्राइवेसी पर अहम चर्चा हुई
राजधानी नई दिल्ली में आयोजित India Today Conclave 2026 के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल निगरानी और प्राइवेसी जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस सत्र में मेरिडिथ व्हिटेकर ने आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एआई को केवल एक साधारण टूल या चैटबॉट के रूप में देखना सही नहीं है, क्योंकि इसके पीछे एक बड़ा तकनीकी ढांचा और डेटा सिस्टम काम करता है जो लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करता है।
एआई केवल टूल नहीं, पूरा सिस्टम
मेरिडिथ व्हिटेकर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को समझने के लिए इसके पूरे इकोसिस्टम को समझना जरूरी है। उनके अनुसार एआई सिस्टम बड़े स्तर पर डेटा और एल्गोरिद्म के माध्यम से काम करते हैं और कई बार ये सिस्टम लोगों के फैसलों, अवसरों और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आज कई डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐसे एल्गोरिद्म का इस्तेमाल करते हैं जो लोगों की गतिविधियों और व्यवहार का विश्लेषण करते रहते हैं।
एआई एजेंट्स को चाहिए निजी डेटा की पहुंच
उन्होंने बताया कि आधुनिक एआई एजेंट्स को काम करने के लिए बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत जानकारी की जरूरत होती है। इनमें ईमेल, कैलेंडर, संपर्क सूची और निजी बातचीत जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। अगर इन सिस्टम्स को इतनी व्यापक पहुंच मिलती है तो इससे डिजिटल प्राइवेसी के लिए नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए तकनीक के उपयोग के साथ-साथ सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
स्पाइवेयर और डिजिटल सुरक्षा पर सवाल
चर्चा के दौरान डिजिटल निगरानी और स्पाइवेयर से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए। उदाहरण के तौर पर Pegasus जैसे मामलों का जिक्र किया गया, जहां फोन में घुसपैठ कर निजी जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है। इस संदर्भ में व्हिटेकर ने कहा कि अगर किसी डिवाइस की सुरक्षा कमजोर हो जाती है तो कोई भी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए डिवाइस और नेटवर्क सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
डिजिटल पहचान और बढ़ती तकनीक
भारत जैसे देशों में डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाएं और डिजिटल पहचान तेजी से बढ़ रही हैं। इस संदर्भ में भी चर्चा के दौरान सवाल उठाया गया कि बढ़ती डिजिटल व्यवस्था के बीच नागरिकों की प्राइवेसी को कैसे सुरक्षित रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के विस्तार के साथ-साथ मजबूत नीतियां और नियम भी जरूरी होते हैं ताकि नागरिकों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
निजता को लेकर जागरूकता जरूरी
सत्र के अंत में यह बात सामने आई कि डिजिटल युग में निजता की अहमियत को समझना बेहद जरूरी है। कई लोग यह सोचते हैं कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए उन्हें प्राइवेसी की चिंता नहीं करनी चाहिए। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि निजता केवल व्यक्तिगत रहस्य का सवाल नहीं बल्कि नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता से भी जुड़ा विषय है। इसलिए तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ लोगों को डिजिटल सुरक्षा और प्राइवेसी के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
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