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फरवरी में नहीं पड़ी ठंड
इस वर्ष फरवरी में एक भी शीत लहर दर्ज नहीं हुई
बदलते मौसम ने बढ़ाई चिंता, फरवरी में नहीं पड़ी शीत लहर पहली बार
25 Feb 2026, 01:26 PM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
देश में इस वर्ष सर्दी के मौसम का स्वरूप सामान्य से अलग देखने को मिला है। फरवरी का महीना आमतौर पर हल्की ठंड के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार पूरे महीने शीत लहर का एक भी दिन दर्ज नहीं किया गया। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा करता है और आने वाले समय में मौसम और अधिक असामान्य हो सकता है।
मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के जनवरी महीने में देशभर में कुल 24 दिनों तक शीत लहर की स्थिति बनी रही। इसके विपरीत फरवरी में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहा और कहीं भी शीत लहर की स्थिति दर्ज नहीं हुई। पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो फरवरी में हमेशा कुछ दिनों तक ठंड का असर बना रहा था। वर्ष 2022 में छह दिन, 2023 में तीन दिन, 2024 में दो दिन और 2025 में भी कुछ दिनों तक शीत लहर दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार शीत लहर का सामान्य पैटर्न भी बदल रहा है। पहले नवंबर और दिसंबर के महीनों में शीत लहर कम और जनवरी-फरवरी में ज्यादा होती थी, लेकिन अब यह समय बदलता दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में ठंड पहले आ रही है और जल्दी समाप्त भी हो रही है। इससे कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार शीत लहर की स्थिति तब मानी जाती है जब न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाए या अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक कम हो। गंभीर शीत दिवस तब माना जाता है जब तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस से अधिक कम हो जाए।
इस वर्ष देश के लगभग 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शीत लहर का प्रभाव देखने को मिला, लेकिन इसकी अवधि सीमित रही। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले वर्षों में सर्दी का मौसम और छोटा हो सकता है। इससे न केवल मौसम चक्र प्रभावित होगा बल्कि जल संसाधनों, खेती और जनजीवन पर भी असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों ने मौसम में हो रहे इन बदलावों को गंभीरता से लेने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देने की सलाह दी है।
मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के जनवरी महीने में देशभर में कुल 24 दिनों तक शीत लहर की स्थिति बनी रही। इसके विपरीत फरवरी में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहा और कहीं भी शीत लहर की स्थिति दर्ज नहीं हुई। पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो फरवरी में हमेशा कुछ दिनों तक ठंड का असर बना रहा था। वर्ष 2022 में छह दिन, 2023 में तीन दिन, 2024 में दो दिन और 2025 में भी कुछ दिनों तक शीत लहर दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार शीत लहर का सामान्य पैटर्न भी बदल रहा है। पहले नवंबर और दिसंबर के महीनों में शीत लहर कम और जनवरी-फरवरी में ज्यादा होती थी, लेकिन अब यह समय बदलता दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में ठंड पहले आ रही है और जल्दी समाप्त भी हो रही है। इससे कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार शीत लहर की स्थिति तब मानी जाती है जब न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाए या अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक कम हो। गंभीर शीत दिवस तब माना जाता है जब तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस से अधिक कम हो जाए।
इस वर्ष देश के लगभग 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शीत लहर का प्रभाव देखने को मिला, लेकिन इसकी अवधि सीमित रही। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले वर्षों में सर्दी का मौसम और छोटा हो सकता है। इससे न केवल मौसम चक्र प्रभावित होगा बल्कि जल संसाधनों, खेती और जनजीवन पर भी असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों ने मौसम में हो रहे इन बदलावों को गंभीरता से लेने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देने की सलाह दी है।
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